
बजा कहे जिसे आलम उसे बजा समझो ज़बान-ए-ख़ल्क़ को नक़्क़ारा-ए-ख़ुदा समझो
दुनिया के जो मज़े हैं हरगिज़ वो कम न होंगे चर्चे यूँही रहेंगे अफ़्सोस हम न होंगे

जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
